Friday, June 23, 2023

श्री दुर्गासप्तशती पढ़ने की विधि | Shri Durga Saptashati Padhne Ka Tarika

श्री दुर्गासप्तशती पढ़ने की विधि |  श्री दुर्गासप्तशती पढ़ने का क्रम | श्री दुर्गासप्तशती पढ़ने का तरीका 

durga shaptashati padhne ka tarika


दुर्गा माता षोडशोपचार पूजा मंत्र और विधि

अखंडज्योत का महत्व | अखंडज्योत बनाने का तरीका | अखंडज्योत जलाने का मंत्र | अखंडज्योत जलाने के फायदे 

श्री दुर्गासप्तशती पढ़ने की विधि इस तरह से है:

  • अथ सप्तश्लोकी दुर्गा 
  • श्री दुर्गाष्टोत्तरशतनाम स्तोत्रम्

  • तत्व शुद्धि के लिए चार बार इन मंत्रों से आचमन करें:

 ऐं आत्मतत्त्वं शोधयामि नमः स्वाहा।
 ह्रीं विद्यातत्त्वं शोधयामि नमः स्वाहा॥
 क्लीं शिवतत्त्वं शोधयामि नमः स्वाहा।
 ऐं ह्रीं क्लीं सर्वतत्त्वं शोधयामि नमः स्वाहा॥
  • प्राणायाम करके गुरुजनों, देवी-देवताओं को याद करके हिंदी या संस्कृत में संकल्प करें |

  • पुस्तक की पंचोपचार विधि से पूजा करें |


  • इसके बाद शापोद्धार करें | शापोद्धार मंत्र का 7 बार जप करें |

  • शापोद्धार का मंत्र है :

' ह्रीं क्लीं श्रीं क्रां क्रीं चण्डिकादेव्यै शापनाशागुग्रहं कुरु कुरु स्वाहा'
  • इसके बाद उत्कीलन मंत्र का 21 बार जाप करें :

'ॐ श्रीं क्लीं ह्रीं सप्तशति चण्डिके उत्कीलनं कुरु कुरु स्वाहा।'
  • इसके जप के पश्चात्‌ 7 बार मृतसंजीवनी विद्या का जाप करना चाहिए |जिसका मंत्र इस प्रकार है :

' ह्रीं ह्रीं वं वं ऐं ऐं मृतसंजीवनि 

विद्ये मृतमुत्थापयोत्थापय क्रीं ह्रीं ह्रीं वं स्वाहा।'

  • मारीचकल्प के अनुसार सप्तशती-शापविमोचन का मन्त्र यह है:

    ' श्रीं श्रीं क्लीं हूं ऐं क्षोभय मोहय उत्कीलय उत्कीलय उत्कीलय ठं ठं।'

इस मंत्र का 108 बार जप करें |

  • कवच को बीज, अर्गला को शक्ति और कीलक को कीलक की संज्ञा दि गयी है | इसलिए पहले कवच फिर अर्गला और उसके बाद कीलक का पाठ होना चाहिए |
  • इसके बाद अथ वेदोक्त रात्रिसूक्त और अथ तंत्रोक्त रात्रिसूक्त पढ़ना चाहिए |
  • देवअथर्वशीर्ष का पाठ करें |
  • 108 बार नवार्ण मंत्र का जाप करें ( नवार्ण मंत्र के जाप से पहले विनियोग, ऋष्यादिन्यास, करन्यास, हृदयादिन्यास, अक्षरन्यास, दिन्ग्यन्यास, ध्यान और माला पूजा पुस्तक में बताये अनुसार करना चाहिए )
  • पुस्तक में दिए अनुसार न्यास, ध्यान और सप्तशती न्यास करें |
  • प्रत्येक चरित्र का विनियोग, ध्यान और प्रत्येक अध्याय का ध्यान पुस्तक में दिया गया है |
  • अध्याय समाप्त होने पर इति, वध, अध्याय या समाप्त शब्द नहीं बोलना चाहिए |

  • प्रथम अध्याय का पाठ करें | (इसे शुरू करने से पहले हाथ में फूल, अक्षत और जल लेकर विनियोग और ध्यान करें , इसके बाद फूल, अक्षत और जल को जमीन पर छोड़ दें )
  • दूसरे अध्याय का पाठ करें | (इसे शुरू करने से पहले हाथ में फूल, अक्षत और जल लेकर विनियोग और ध्यान करें , इसके बाद फूल, अक्षत और जल को जमीन पर छोड़ दें )
  • तीसरे अध्याय का पाठ करें | (इसे शुरू करने से पहले हाथ में फूल, अक्षत और जल लेकर ध्यान करें , इसके बाद फूल, अक्षत और जल को जमीन पर छोड़ दें )
  • चौथे अध्याय का पाठ करें | (इसे शुरू करने से पहले हाथ में फूल, अक्षत और जल लेकर ध्यान करें , इसके बाद फूल, अक्षत और जल को जमीन पर छोड़ दें )
  • पांचवे अध्याय का पाठ करें | (इसे शुरू करने से पहले हाथ में फूल, अक्षत और जल लेकर विनियोग और ध्यान करें , इसके बाद फूल, अक्षत और जल को जमीन पर छोड़ दें )
  • छठे अध्याय का पाठ करें | (इसे शुरू करने से पहले हाथ में फूल, अक्षत और जल लेकर ध्यान करें , इसके बाद फूल, अक्षत और जल को जमीन पर छोड़ दें )
  • सांतवे अध्याय का पाठ करें | (इसे शुरू करने से पहले हाथ में फूल, अक्षत और जल लेकर ध्यान करें , इसके बाद फूल, अक्षत और जल को जमीन पर छोड़ दें )
  • आठवें अध्याय का पाठ करें | (इसे शुरू करने से पहले हाथ में फूल, अक्षत और जल लेकर ध्यान करें , इसके बाद फूल, अक्षत और जल को जमीन पर छोड़ दें )
  • नवें अध्याय का पाठ करें | (इसे शुरू करने से पहले हाथ में फूल, अक्षत और जल लेकर ध्यान करें , इसके बाद फूल, अक्षत और जल को जमीन पर छोड़ दें )
  • दसवें अध्याय का पाठ करें | (इसे शुरू करने से पहले हाथ में फूल, अक्षत और जल लेकर ध्यान करें , इसके बाद फूल, अक्षत और जल को जमीन पर छोड़ दें )
  • ग्यारहवें अध्याय का पाठ करें | (इसे शुरू करने से पहले हाथ में फूल, अक्षत और जल लेकर ध्यान करें , इसके बाद फूल, अक्षत और जल को जमीन पर छोड़ दें )
  • बारहवें अध्याय का पाठ करें | (इसे शुरू करने से पहले हाथ में फूल, अक्षत और जल लेकर ध्यान करें , इसके बाद फूल, अक्षत और जल को जमीन पर छोड़ दें )
  • तेरहवें अध्याय का पाठ करें | (इसे शुरू करने से पहले हाथ में फूल, अक्षत और जल लेकर ध्यान करें , इसके बाद फूल, अक्षत और जल को जमीन पर छोड़ दें )

  • 108 बार नवार्ण मंत्र का जाप करें ( नवार्ण मंत्र के जाप से पहले विनियोग, ऋष्यादिन्यास, करन्यास, हृदयादिन्यास, अक्षरन्यास, दिन्ग्यन्यास, ध्यान और माला पूजा पुस्तक में बताये अनुसार करना चाहिए )
  • करन्यास, हृदयादिन्यास और ध्यान करके ऋग्वेदोक्त देवीसूक्त पढ़ना चाहिए |
  • फिर अथ तंत्रोक्त देवीसूक्त पढ़ें |
  • तीनो रहस्ययों का पाठ करें |

  • शापोद्धार मंत्र का 7 बार जप करें |

  • शापोद्धार का मंत्र है :

  • ' ह्रीं क्लीं श्रीं क्रां क्रीं चण्डिकादेव्यै शापनाशागुग्रहं कुरु कुरु स्वाहा'
  • इसके बाद उत्कीलन मंत्र का 21 बार जाप करें :

  • 'ॐ श्रीं क्लीं ह्रीं सप्तशति चण्डिके उत्कीलनं कुरु कुरु स्वाहा।'
  • 7 बार मृतसंजीवनी विद्या का जाप करना चाहिए |जिसका मंत्र इस प्रकार है:

  • ' ह्रीं ह्रीं वं वं ऐं ऐं मृतसंजीवनि 

    विद्ये मृतमुत्थापयोत्थापय क्रीं ह्रीं ह्रीं वं स्वाहा।'


  • फिर क्षमा प्रार्थना करें |
  • श्री दुर्गामानस पूजा, अथ दुर्गाद्वात्रिंशन्नाममाला, अथ देवक्षमास्तोत्रं, सिद्धकुंजिकास्तोत्रम का पाठ करें |
  • फिर दुर्गा माता की आरती करें |




प्रश्न : दुर्गा माता को क्या नहीं चढ़ाना चाहिए ?
उत्तर : दुर्गा माता को आक, दूर्वा और तुलसी नहीं चढ़ाई जाती है |


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