Thursday, July 20, 2023

Vinayak Chaturthi - 21 July 2023, Friday, Vrat Puja Vidhi, Significance and Importance, Mantra and Stotra, Vrat Katha, Remedies Done on Vinayak Chaturthi

Vinayak Chaturthi - 21 July 2023, Friday, Vrat Puja Vidhi, Significance and Importance, Mantra and Stotra, Vrat Katha, Remedies Done on Vinayak Chaturthi


Vinayak chaturthi

Every month there are two Chaturthi, one is Krishna Paksha Chaturthi and second is Shukla Paksh Chaturthi. In every month Shukla Paksh Chaturthi is celebrated as Vinayak Chaturthi.
On this day devotees offer worship and observe fasting to get blessings from Lord Ganesha for prosperity, wealth, wisdom, good luck and knowledge. On this day Siddhivinayak form of Ganapati is worshipped. Those who worship this form of Ganapati their all tasks get completed and they get success in their work.


Vinayak Chaturthi Vrat Puja Vidhi:

  • On this day wake up early and take bath. Wear yellow or red cloth on this day.
  • Clean the puja place of home and place the ganapati photo on wooden frame with red or yellow cloth on it.
  • Do abhishek of Lord Ganesha with panchamrit and water. 
  • Then offer him sindur. 
  • Do panchopachar puja. Offer him durva, fruits, flowers and sweets etc.
  • Light up a ghee diya and a aromatic inscence or dhoop.
  • Read Vinayak Chaturthi Vrat Katha.
  • Chant Ganapati Mantra "Om Gam Ganpatye Namah" 108 times.
  • Recite Sankat Nashan Ganesh Stotram.
  • Do arati.
  • Then have fruits and milk. 
  • On the next day of Panchami Tithi, break the fast.

Shree Sankat Nashan Ganesh Stotram:

॥ श्री गणेशायनमः ॥
नारद उवाच -
प्रणम्यं शिरसा देव गौरीपुत्रं विनायकम ।
भक्तावासं: स्मरैनित्यंमायु:कामार्थसिद्धये ॥1
प्रथमं वक्रतुंडंच एकदंतं द्वितीयकम ।
तृतीयं कृष्णं पिङा्क्षं गजवक्त्रं चतुर्थकम ॥2
लम्बोदरं पंचमं च षष्ठं विकटमेव च
सप्तमं विघ्नराजेन्द्रं धूम्रवर्ण तथाष्टकम् ॥3
नवमं भालचन्द्रं च दशमं तु विनायकम ।
एकादशं गणपतिं द्वादशं तु गजाननम ॥4
द्वादशैतानि नामानि त्रिसंध्य य: पठेन्नर: ।
न च विघ्नभयं तस्य सर्वासिद्धिकरं प्रभो ॥5
विद्यार्थी लभते विद्यां धनार्थी लभते धनम् ।
पुत्रार्थी लभते पुत्रान् मोक्षार्थी लभते गतिम् ॥6
जपेद्वगणपतिस्तोत्रं षड्भिर्मासै: फलं लभेत् ।
संवत्सरेण सिद्धिं च लभते नात्र संशय: ॥7
अष्टभ्यो ब्राह्मणेभ्यश्च लिखित्वां य: समर्पयेत ।
तस्य विद्या भवेत्सर्वा गणेशस्य प्रसादत: ॥8
॥ इति श्रीनारदपुराणे संकष्टनाशनं गणेशस्तोत्रं सम्पूर्णम्‌ ॥

Remedies done on Vinayak Chaturthi:

  • On the day of Vinayak Chaturthi worship of Shwetaark Ganapati increases the wealth and happiness. Worshipping Shwetaark Ganapati gives strength to Mercury in horoscope. 
  • Lord Ganesha loves Durva, offering durva to Ganapati on this day brings wealth and happiness.
  • For the problem of debt: Bring photo of Ganapati with mushak. Keeping this type of photo of Ganapati in home removes the debt.
  • For solving financial problems: Light up a four sided diya. By doing so one gets rid of all the difficulties.
  • For gaining intelligence and higher education: Students should chant "Om Gam Ganapatye Namah" 108 times. 
  • For destroying every hurdles and difficulties: Chant "Om Ekdantaaye Vidmahe Vakratundaaye Dheemahi Tanno Danti Prachodayat"
    • On the day of Vinayak Chaturthi, offer 5 pieces of yellow Turmeric to Ganapati and sprinkle haldi mixed with water on 108 durva grass then offer this durva grass to Lord Ganapati by chanting "Om Ganadhipatye Namah". This should be done for 10 days. By doing this finance start to increase and chances of promotion in job increases.
    • For fulfilling wishes: Offer durva with 21 round pieces of gud on Vinayak Chaturthi Day. By doing so Lord Ganapati become happy soon and wishes of devotees become fulfilled.
    • For removing obstacles: Chant "Vakratunda Mahakaya Suryakoti Samaprabha, Nirvighnam Kurume Dev Sarwa Karyeshu Sarwada".
    • For promotion in Job and business: Put a photo of standing Lord Ganesha and his feet should be touching the ground. This type of photo in business area always gives benefit.

    Vinayak Chaturthi Vrat Katha:


    विनायक चतुर्थी व्रत की पौराणिक कथा के अनुसार एक बार भगवान शिव और माता पार्वती नर्मदा नदी के किनारे बैठे थे। माता पार्वती ने शिव जी से चौपड़ खेलने के लिए कहा। इस खेल में हार-जीत का फैसला करने के लिए भगवान शिव ने कुछ तिनके एकत्रित कर उसका एक पुतला बनाकर उसकी प्राण-प्रतिष्ठा कर दी। भगवान शिव ने उस पुतले से कहा कि 'बेटा, हम चौपड़ खेलना चाहते हैं, इसीलिए तुम बताना कि हम दोनों में से कौन हारा और कौन जीता?'

    उसके बाद भगवान शिव और माता पार्वती के बीच खेल का प्रारंभ हो गया। यह खेल 3 बार खेला गया और तीनों ही बार माता पार्वती जीत गईं। खेल समाप्त होने पर उस बालक से हार-जीत का फैसला करने के लिए कहा, तो उस बालक ने पार्वती माता की जगह महादेव को विजयी बताया।

    यह सुनकर माता पार्वती क्रोधित हो गईं और उन्होंने बालक को लंगड़ा होने और कीचड़ में पड़े रहने का श्राप दे दिया। बालक ने माता पार्वती से माफी मांते हुए कहा कि माता मुझसे अज्ञानतावश ऐसा हुआ है।

    बालक द्वारा क्षमा मांगने पर माता का दिल पिघल गया उन्होंने कहा- 'यहां गणेश पूजन के लिए नागकन्याएं आएंगी, उनके कहे अनुसार गणेश व्रत करो, ऐसा करने से तुम्हारे कष्ट दूर होंगे' यह कहकर माता पार्वती चली गईं।

    एक वर्ष के बाद उस स्थान पर नागकन्याएं आईं, नागकन्याओं से भगवान गणेश के व्रत की विधि जानने के बाद बालक ने 21 दिन लगातार गणेशजी का व्रत किया। जिसके परिणामस्वरूप गणेशजी प्रसन्न हुए। उन्होंने बालक को मनोवांछित फल मांगने के लिए कहा।

    बालक ने कहा- 'हे विनायक! मुझे इतनी शक्ति दीजिए कि मैं अपने पैरों से चलकर कैलाश पर्वत पर पहुंच सकूं'। भगवान गणेश ने बालक को वरदान दे दिया। इसके बाद वह बालक कैलाश पर्वत पर पहुंचा और उसने अपनी कथा भगवान शिव को सुनाई।

    चौपड़ वाले दिन से माता पार्वती शिवजी से नाराज हो गई थीं। देवी को मनाने के लिए भगवान शिव ने भी बालक के बताए अनुसार 21 दिनों तक भगवान गणेश का व्रत किया। इस व्रत के प्रभाव से माता पार्वती की नाराजगी दूर हो गई और वो स्वयं भगवान शिव से मिलने पहुंच गईं।

    तब भगवान शंकर ने माता पार्वती को इस व्रत के बारे में बताया। यह सुनकर माता पार्वती के मन में अपने पुत्र कार्तिकेय से मिलने की इच्छा जागृत हुई। तब माता पार्वती ने भी 21 दिन तक श्री गणेश का व्रत किया। व्रत के 21वें दिन कार्तिकेय स्वयं माता पार्वतीजी से मिलने चले आए। तभी से ये व्रत समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाला व्रत माना जाता है।

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